बंदिशें
देखा जो आईना तो मुझको मैं ना दिखा
एक लड़का खड़ा था डरा-सहमा सा
दुनिया की रेस में दौड़ के थक गया
और जाना कहां मुझको खुद ना पता
पिता चाहते मैं खुद को इंजीनियर कहूँ
सोच माॅ की हँसी और पिता की खुशी
काटों की राह पे खुद को ले चल पड़ा
और करता भी क्या मन मे एक ही वजह
माँ ने जन्म था दिया किया पिता ने कबड़।।
•नितिन पाराशर
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Oh yeah...!!!
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